प्रिकोल के मजदूरों को इस “अपराध” के लिये सजा दी जा रही है क्योंकि उन्होंने तमिलनाडु के संकट झेल रहे किसानों के साथ एकजुटता का इजहार किया है! गहरे कृषि संकट की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु के संघर्षरत किसानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए तमाम केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने आम हड़ताल का आह्वान किया था, उसके ही तहत कोयम्बटूर स्थित प्रिकोल लिमिटेड के मजदूरों ने 25 अप्रैल 2017 को एक-दिवसीय हड़ताल की थी. इसकी सजा देते हुए प्रिकोल के प्रबंधन ने एकजुटता हड़ताल में शामिल होने वाले प्रिकोल के 840 मजदूरों की आठ दिनों की तनख्वाह अवैध रूप से काट ली. इसके प्रतिवाद में कोयम्बटूर में 16 मजदूरों ने और चेन्नई में 6 मजदूरों ने 19 जून 2017 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आरम्भ कर दी है. उनकी मांग है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 10(1) और 10-बी के तहत तमिलनाडु सरकार इस सजा के बतौर आठ दिनों का वेतन काटने के प्रबंधन के निर्देश को वापस लेने के लिये हस्तक्षेप करे. भूख हड़ताल पर बैठे मजदूरों से मुलाकात करने और उनका समर्थन करने के लिये पीयूसीएल के बालमुरुगन और परमाणु संयंत्र विरोधी आंदोलन के कार्यकर्ता एवं एआईपीएफ की अभियान समिति के सदस्य एस.पी. उदयकुमार समेत विभिन्न केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के नेता एवं कार्यकर्ता आदि भूख-हड़ताल स्थल पर आये.
प्रिकोल मजदूरों के समर्थन में तंजौर में मजदूरों एवं किसानों ने मिलकर एक-दिवसीय भूख हड़ताल की. उत्तराखंड के सिडकुल श्रमिक मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी के मारफत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भेजा, जिसमें उन्होंने अवैध रूप से वेतन काटे जाने के फैसले को वापस लिया जाना सुनिश्चित करने के लिये मुख्यमंत्री से मांग की है.
प्रतिवादकारी प्रिकोल के मजदूरों ने कॉमरेड जफर खान को न्याय देने की मांग उठाई है, जिन्हें राजस्थान में भीड़-हत्या का शिकार बनाया गया. साथ ही मजदूरों ने योगी आदित्यनाथ के दौरे का प्रतिवाद करने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के गिरफ्तार छात्रों की रिहाई तथा भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ को रिहा किए जाने की भी मांग की है.