सीबीएसई द्वारा प्रकाशित एक अधिसूचना (6 जून 2017) के जरिए छात्रों को पता चला कि ‘नेट’ की आगामी परीक्षा अब 19 नवंबर 2017 को आयोजित की जाएगी ( जिसका मतलब यह हुआ कि जुलाई 2017 में होने वाली नेट परीक्षा व्यवहारतः रद्द कर दी गई. अखबारों में यह खबर भी आई है कि यूजीसी ने नेट के लिए क्वालिफाई करने वाले छात्रों की सीमा 6 प्रतिशत तक घटा दी है. जनवरी 2017 तक की नेट परीक्षा में 15 प्रतिशत अर्हता प्राप्त छात्रों को नेट के लिए उत्तीर्ण घोषित किया गया था. इस प्रकार देखा जा सकता है कि यूजीसी और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नेट और जेआरएफ के लिए उत्तीर्णता का दायरा चुपचाप काफी कम कर दिया.
इस कदम से अध्यापन व्यवसाय या उच्चतर शोध की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए अवसर काफी सीमित हो जाएंगे. इसके अलावा, यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि हर वर्ष नेट क्वालिफाई करने वाले छात्रों की संख्या कम हो जाने से जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिपद्ध की संख्या भी कम हो जाएगी ( क्योंकि नेट में उत्तीर्ण छात्रों की एक छोटी संख्या को ही जेआरएफ मिल पाता है. इस प्रकार यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में साजिशाना ढंग से शोध-छात्रवृत्ति में कटौती करने का ही एक प्रयास है. इसके अलावा, यूजीसी की 2 जून 2017 की अधिसूचना - जिसमें तृतीय श्रेणी के विश्वविद्यालयों (हमारे देश के अधिकांश कॉलेज / विश्वविद्यालय इसी श्रेणी में आते हैं) में पीएचडी में भर्ती होने के लिए नेट उत्तीर्णता को अनिवार्य शर्त बनाना प्रस्तावित है - के साथ 6 प्रतिशत की यह सीमाबंदी और अर्धवार्षिक परीक्षा की समाप्ति सैकड़ों छात्रों के लिए शोध का क्षेत्र काफी कम कर देगी. यह भी स्पष्ट नहीं हो रहा है कि 6 प्रतिशत की इस सीमा के अंतर्गत आरक्षण नीति तथा एससी/एसटी, ओबीसी और पीएच/वीएच छात्रों के लिए उत्तीर्णता में ढील देने की नीति कैसे लागू की जाएगी.
15 जून को जेएनयू, डीयू, जामिया मिलिया तथा हरियाणा के एमजी विश्वविद्यालय के छात्रों ने यूजीसी मुख्यालय के सामने प्रदर्शन किया और यूजीसी नेट की अर्धवार्षिक परीक्षा चक्र को पुनर्बहाल करने तथा वर्तमान व्यवस्था के अनुसार हर वर्ष दो बार नेट परीक्षा की गारंटी करने की मांग उठाई. इस मौके पर आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे ने कहा कि “6 जून की अधिसूचना छात्रों की पीठ में छुरा मारने के समतुल्य है. अप्रैल माह में यूजीसी ने कहा था कि वह सामान्य ढंग से ही नेट की परीक्षा आयोजित करेगी - इसमें अधिक से अधिक दो सप्ताह का विलंब हो सकता है ( लेकिन अब वह जुलाई की नेट परीक्षा को पूरी तरह टाल देने की अधिसूचना जारी कर रहा है. भारत में उच्च शिक्षा की इच्छा रखने वाले छात्रों पर यह एक दूसरा बड़ा हमला है.”
प्रतिवादकारी छात्रों को संबोधित करते हुए दिल्ली वि.वि. की आइसा अध्यक्ष कंवलप्रीत कौर ने कहा, “यह स्पष्ट हो रहा है कि ये सारे कदम साजिशाना ढंग से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध-छात्रवृत्ति में कटौती करने के लिए ही उठाए जा रहे हैं. हमने देखा है कि इसके पूर्व यूजीसी ने किस प्रकार 2015 में गैर-नेट छात्रवृत्ति में कटौती करने का प्रयास किया था और फिर शोध कार्य में नामांकन को सीमित करने वाली यूजीसी अधिसूचना (5 मई 2016) के जरिए छात्र-सुपरवाइजर अनुपात को भी कम करने का फरमान जारी कर दिया.” कंवलप्रीत ने आगे कहा कि “हम एक ऑनलाइन याचिका भी चला रहे हैं, जो यूजीसी अध्यक्ष को सौंपी जाएगी. अबतक 2000 से ज्यादा छात्रों ने इस याचिका पर दस्तखत किए हैं.”
प्रतिवाद प्रदर्शन में एसएफआइ, जेएनयू कलेक्टिव तथा एमजी विश्वविद्यालय हरियाणा के छात्र भी शामिल थे.योगी के आगमन पर आइसा का विरोध मार्च
दरभंगा में 15 जून 2017 को उत्तर प्रदेश के कुख्यात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिथिलांचल आने पर आइसा एवं एआईएसएफ ने एमएलएसएम कॉलेज से माथे पर काली पट्टी बांधकर विरोध मार्च निकाला. विरोध मार्च रेडियो स्टेशन, हाइकोर्ट चौक होते हुए ल.न. मिथिला विश्वविद्यालय के गेट पर पहुंच जहां उसकी पुलिस के साथ झड़प हुई. वहीं सदर डीएसपी के नेतृत्व में तैनात पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करके विश्वविद्यालय थाना भेज दिया. जुलूस में छात्र नारा लगा रहे थे ‘योगी सरकार मुर्दाबाद’, ‘लखनऊ में गिरफ्तार 14 छात्रों को रिहा करो’, ‘मिथिलांचल में दंगाई राजनीति नहीं चलेगी’, ‘भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर को रिहा करना होगा’ आदि. मार्च का नेतृत्व आइसा नेता संदीप कुमार चौधरी, एआईएसएफ के मृत्युंजय मृणाल, इनौस के केसरी कुमार यादव आदि कर रहे थे.
विश्वविद्यालय थाना में पत्रकारों को संबोधित करते हुए वामपंथी छात्र नेताओं ने कहा कि लखनऊ में दलितों को न्याय और चंद्रशेखर की रिहाई की मांग करते हुए योगी को काला झंडा दिखाने पर लखनऊ में छात्रों को गिरफ्तार करके योगी-विरोधी छात्र आंदोलन को रोका नहीं जा सकता. हम सब उनके साथ हैं और और योगी को चेतावनी दे रहे हैं कि मिथलांचल की धरती पर उनको मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. विरोध मार्च में प्रिंस कर्ण, विशाल माझी, मयंक कुमार, मो आकिब नजर, मो सनाउल्लाह, एआइएसएफ के अवनीश कुमार, शशिरंजन सिंह आदि दर्जनों छात्र मौजूद थे.