साहित्यकार तेज सिंह

हिन्दी के प्रख्यात आलोचक और अम्बेडकरवादी साहित्य के मूर्धन्य प्रवक्ता तथा अपेक्षा त्रौमासिक पत्रिका के संपादक तेज सिंह की दिनांक 15 जुलाई 2014 को शाम लगभग 3 बजे हृदय गति रुक जाने के कारण मृत्यु हो गई. तेज सिंह का जन्म दिल्ली के घोंडली में 13 जुलाई 1946 में हुआ था. उन्होंने हिन्दी साहित्य को अपनी तमाम आलोचनात्मक कृतियों से समृद्धिकिया. उनकी कृतियों में नागार्जुन का कथा-साहित्य, राष्ट्रीय आन्दोलन और हिन्दी उपन्यास, आज का दलित साहित्य, अम्बेडकरवादी साहित्य का समाजशास्त्रा, अम्बेडकरवादी साहित्य की अवधारणा, अम्बेडकरवाद और मार्क्सवाद का द्वंद्वात्मक सम्बन्ध, प्रतिरोध की बहुजन संस्कृति, अम्बेडकरवादी विचारधारा- इतिहास और दर्शन आदि ने अस्मिता विमर्श के पृथकतावादी और शुद्धतावादी भावधारा के विपरीत दलित आंदोलन को एक नया और गतिमान वैज्ञानिक आवेग दिया. कृतियों के शीर्षक ही अपने आप में इस बात की ताईद करते हैं कि उनकी गति समाजशास्त्रीय आलोचना के साथ-साथ साहित्य के विचारधारात्मक और दार्शनिक पक्ष तक अपना विस्तार पाती थी. हिन्दी के दलित विमर्श मे चली तमाम बहसों में सीधे शामिल होकर और उनको गति देकर समाज को एक मानवीय प्रगतिशील दिशा में सोचने को प्रेरित किया. हमें याद है कि उन्होंने अस्मितावाद के खतरों को भांपते हुये ही दलित साहित्य को उन्होंने अम्बेडकरवादी साहित्य कहने को प्रस्तावित किया था. तेज सिंह ऐसे लेखक थे जिनका संघर्ष भारतीय समाज के तथाकथित उच्च जातियों में व्याप्त ब्राह्मणवाद से तो था ही साथ ही वे दलित जातियों में व्याप्त ब्राह्मणवादी विचारों और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ भी लगातार संघर्ष कर रहे थे. उन्होंने कथा आलोचना को अम्बेडकरवादी दृष्टि से समृद्धिकर अपना महत्वपूर्ण योगदान किया.


  समाज में व्याप्त जातिवाद, सामंतवाद, ब्राह्मणवाद और लैंगिक पूर्वाग्रह के खिलाफ संघर्ष का हमारा संकल्प ही हमारे प्रिय आलोचक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलिहो सकती है.